उस परमेश्वर की सत्ता यानि अधिपत्य संहस्र कमल (हजार पंखुड़ी वाले कमल) परभी है क्योंकि वह कुल का मालिक (वासुदेव) है। संहस्र कमल बाग का भावार्थ है कि जहाँहजार ज्योतियों का बाग-सा लगा है। उस स्थान का मालिक वास्तव में सतपुरूष (अविगतराम) ही है। जैसे चक्रवर्ती सम्राट के आधीन सर्व राजा तथा उनके सुंदर नगर व निवास भीआते हैं। वे उसी के माने जाते हैं। उस परमेश्वर को प्राप्त करने वाले नामों में एक सोहंनाम भी है। अन्य मंत्रा (नाम) भी हैं जिनको तरतीजन यानि क्रमवार (बारी-बारी, एक के बाददूसरा ऐसे तरतीवार) दिया जाता है। सोहं नाम के जाप में ध्यान लगना ही संतों की समाधिहै। इसी में धुन (लगन) लगाते हैं। इसको सहज समाधि कहते हैं

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आत्म_हत्या_सही_या_गलतपहली बात तो यह कि आत्महत्या करना बहुत ही गलत है। आत्मा की किसी भी रीति से हत्या नहीं की जा सकती। हत्या होती है शरीर की। इसे स्वघात कह सकते हैं। दूसरों की हत्या से ब्रह्म दोष लगता है लेकिन खुद की ही देह की हत्या करना बहुत बड़ा अपराध है। जिस देह ने आपको कितने भी वर्ष तक इस संसार में रहने की जगह दी। संसार को देखने, सुनने और समझने की शक्ति दी। जिस देह के माध्यम से आपने अपनी प्रत्येक इच्‍छाओं की पूर्ति की और सबसे महत्व पूर्ण बात ये कि इस मानव शरीर से हम भक्ति करके अपना मोक्ष कर सकते है। ईश्वर ने ये गुण सिर्फ मनुष्य के शरीर में ही दिया है जो अपने जन्म मरण के चक्र को मिटा सकता है।उस देह की हत्या करना बहुत बड़ा अपराध है।

#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज🥀🥀🥀🥀🪕कबीर, गुरु बड़े हैं गोविन्द से, मन में देख विचार।हरि सुमरे सो वारि हैं, गुरु सुमरे होय पार।।कबीर, राम कृष्ण से कौन बड़ा उन्हूं भी गुरु किन्हं।तीन लोक के वे धनी, गुरु आगे आधीन।।