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उस परमेश्वर की सत्ता यानि अधिपत्य संहस्र कमल (हजार पंखुड़ी वाले कमल) परभी है क्योंकि वह कुल का मालिक (वासुदेव) है। संहस्र कमल बाग का भावार्थ है कि जहाँहजार ज्योतियों का बाग-सा लगा है। उस स्थान का मालिक वास्तव में सतपुरूष (अविगतराम) ही है। जैसे चक्रवर्ती सम्राट के आधीन सर्व राजा तथा उनके सुंदर नगर व निवास भीआते हैं। वे उसी के माने जाते हैं। उस परमेश्वर को प्राप्त करने वाले नामों में एक सोहंनाम भी है। अन्य मंत्रा (नाम) भी हैं जिनको तरतीजन यानि क्रमवार (बारी-बारी, एक के बाददूसरा ऐसे तरतीवार) दिया जाता है। सोहं नाम के जाप में ध्यान लगना ही संतों की समाधिहै। इसी में धुन (लगन) लगाते हैं। इसको सहज समाधि कहते हैं
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