Skip to main content
कबीर, ज्ञान सम्पूर्ण हुआ, नहीं हृदय नहीं छिदाया। देखा देखी भक्ति का रंग नहीं ठहराया।।कबीर, मां मूडूं उस सन्त की, जिससे संशय न जाय। काल खावें थोड़े संशय सबहन कूं खाय।।गरीब, बीजक की बांता करैं, बीजक नाहीं हाथ। पृथ्वी डोबन उतरे, कह-कह मीठी बात।।गरीब, बीजक की बातां कहै , बीजक नाहीं पास। औरों को प्रमोद ही, आपन चले निरास।।कबीर, करनी तज कथनी कथें, अज्ञानी दिन रात। कुकर ज्यों भोंकत फिरें, सुनी सुनाई बात।।
Popular posts from this blog